तेल उद्योग विकास बोर्ड का गठन तेल उद्योग (विकास) अधिनियम 1974 के लागू होने के बाद 1975 में किया गया। बोर्ड उक्त (अधिनियम के तहत, अनुदानों, अग्रिम ऋणों, ऋणों व आस्थागित भुगतानों पर गारंटी तथा तेल संबंधी औद्योगिक संस्थाओं के स्टॉक, शेयर, बॉड तथा डिवेंचरों में अंशदान तथा सहयोग देने के माध्यम से उनकी सहायता प्रदान करता है। बोर्ड द्वारा निम्नलिखित गतिविधियों को संचालित करने के लिए सहायता प्रदान की जाती है:- 

  • भारत के भीतर या बाहर खनिज तेल की संभावनाओं का पता लगाने या अन्वेषण के लिए,
  • कच्चे तेल के उत्पादन, रखरखाव, भण्डारण और परिवहन के लिए सुविधाओं को स्थापित करने हेतु,
  • पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों का परिष्करण तथा विपणन के लिए,
  • पेट्रोरसायन और उर्वरकों के निर्माण तथा विपणन के लिए, 
  • वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी तथा आर्थिक अनुसंधानों के लिए जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से तेल उएछोग के लिए उपयोगी हों,
  • तेल उद्योग के किसी भी क्षेत्र में प्रयोगात्मक या मार्गदर्शी अध्ययन के लिए,
  • तेल उद्योगों में लगे या तेल उद्योगों  में लगने वाले किसी भी क्षेत्र के अन्य  कामों में लगे कर्मियों को भारत में या विदेशों  में प्रशिक्षण तथा अन्य विहित उपायों के लिए। 

अपने उद्देश्य  के अनुसरण में तेउविबो पाँच नियमित अनुदान ग्राही संगठन अर्थात डीजीएच, सीएचटी, ओआईएसडी, पीसीआरए तथा पीपीएसी को अनुदान के माध्यम से सहायता प्रदान करता है। बोर्ड, राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान को सिवासागर, असम और जयास रायबरेली परियोजना पूंजीगत व्यय को पूरा करने के लिए भी अनुदान प्रदान कर रहा है। 


तेल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढावा देने हेतु तेउविबो विभिन्न परियोजनाओं जैसे भारतीय पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी, देहरादून, राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, आई आई टी, मुंबई, बिरला प्रौद्योगिकी संस्थाान, रांची, सेंटर इंस्टि्ीटयूट आफॅ प्लास्टिक्स इंजीनियर एण्डी टैक्नोलॉजी, चैन्नई, भारतीदासन विश्वंविद्यालय, तामिलनाडू तथा राजस्थान सरकार की विभिन्न परियोजनाओं को भी सहायता प्रदान की है। इसके अतिरिक्त्, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, भारत सरकार द्वारा हाईड्रोजन को ओटो ईंधन के रूप में बढावा देने हेतु बनाए गये हाईड्रोजन कॉपर्स फंड के लिए भी 40 करोड का योगदान दिया गया। 

तेउविबो 1974-75 में अपने गठन से ही तेल क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनियों को ऋण प्रदान कर रहा है। तेउविबो द्वारा वितरित ऋण 1974-75 में 16.01 करोड रूपये से बढकर पिछले 5 वर्षों में लगभग 1900 करोड रूपये तक बढ गया। गेल, आईओसीएल, एचपीसीएल, बीपीसीएल और एमआरपीएल, तेउविबो द्वारा जारी ऋण के मुख्य लाभार्थी हैं। ऋणों का उपयोग मुख्य रूप से गैस और तेल पाइपलाइंन परियोजनाओं, नई रिफाइनरियों की स्थापना,  मौजूदा रिफाइनरियों में गुणवता सुधार, सिंगल प्वाोइंट मूरिंग परियोजनाओं तथा शहरी गैस वितरण परियोजनाओं के लिए फंड उपलब्ध कराने के लिए किया गया। 

इंडियन स्ट्रेटिजिक पेट्रोलियम लिमिटेड (आईएसपीआरएल) तेउविबो की सहायक कंपनी है। आईएसपीआरएल विशेष प्रयोजन व्यवस्था के माध्यम से तीन स्थानों अर्थात् विशाखापट्नम, मंगलौर तथा पादुर (उड्डपी के पास) 5 मिलियन मिलिट्रिक टन (एमएमटी) सामरिक करने कच्चे तेल भण्डार कर रहा है। ये सामरिक भंण्डार तेल कंपनियों के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के मौजूदा भण्डारण के अलावा होगा और बाहरी आपूर्ति अवरोधों के लिए एक कुश्न के रूप में काम करेगा। आईएसपीआरएल की स्वीकृत इक्विटी में तेउविबो द्वारा रूपये 3832.56 करोड का योगदान है। 


तेउविबो ने पेट्रोफैड के साथ हाइड्रोकार्बन क्षेत्र कौशल परिषद (एचएसएससी) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाइड्रोकार्बन उद्योग की विभिन्न  कौशल आवश्यकताओं को पूरा करने तथा स्थानीय और विश्व स्तर पर और रोजगार और अवसरों को बढाना एचएसएससी का उद्देश्य  है। 

तेउविबो, सूखा राहत ट्रस्ट‍ का भी रखरखाव करता है। इस ट्रस्ट का गठन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा 9.7.2000 को किया गया। वर्ष 2001-02 में इसके गठन के बाद से अब तक ट्रस्ट द्वारा लगभग 15 करोड रूपये जारी किए जा चुके हैं।


अंतिम अद्यतन तिथि: 08/11/2017
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