तेल उद्योग (विकास) अधिनियम, 1974 में तेउविबो के दिए गए उद्देश्य के अनुसार, तेउविबो तेल उद्योगों के विकास हेतु सहायक गतिविधियों के लिए वित्तीय एवं अन्य सहायता उपलब्ध करता है।

तदानुसार बोर्ड, (क) अनुदान, (ख) तेल उद्योगों को अग्रिम ऋण, (ग) इक्विटी में निवेश, (घ) तेउविबो राहत ट्रस्ट का रखरखाव, (ड) हाइड्रोजन कार्पस फंड (एचसीएफ) का प्रबंधन एवं उसमें योगदान करता है

अनुदान जारी करना - तेल उद्योग विकास बोर्ड पाँच नियमित अनुदान ग्राही संगठन अर्थात हाइड्रोकार्बन महा निदेशालय (डीजीएच), उच्‍च प्रौद्योगिकी केन्‍द्र (सीएचटी), तेल उद्योग सुरक्षा निदेशालय,  (ओआईएसडी), पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ (पीसीआरए)पेट्रोलियम योजना एवं विलेशण कक्ष, (पीपीएसी) को अनुदान के माध्‍यम से सहायता प्रदान करता है। बोर्ड, राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्‍थान को सिवासागर, असम और जयास रायबरेली परियोजना के पूंजीगत व्‍यय को पूरा करने के लिए भी अनुदान प्रदान कर रहा है। 

अग्रिम ऋण देना -  तेउविबो 1974-75 में अपने गठन से ही तेल क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनियों को ऋण प्रदान कर रहा है। तेउविबो द्वारा वितरित ऋण 1974-75 में 16.01 करोड रूपये से बढकर विगत वर्षों में लगभग 1900 करोड रूपये तक बढ गया। गेल, आईओसी, एचपीसीएल, बीपीसीएल और एमआरपीएल, तेउविबो द्वारा जारी ऋण के मुख्य लाभार्थी हैं। ऋणों का उपयोग मुख्य रूप से, गैस और तेल पाइपलाइन परियोजनाओं, नई रिफाइनरियों की स्थापना, मौजूदा रिफाइनरियों में गुणवता सुधार, सिंगल प्वायइंट मूरिंग परियोजनाओं तथा शहरी गैस वितरण परियोजनाओं के लिए निधियां उपलब्ध कराने के लिए किया गया। 

अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को सहायता देना - तेल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढावा देने हेतु तेउविबो विभिन्न अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को वित्तीेय सहायता प्रदान कर रहा है। जैसे तेउविबो द्वारा भारतीय पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी, देहरादून, राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, आई आई टी, मुंबई, बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, रांची, सेंटर इंस्टि्टयूट आफॅ प्लारस्टिक्स  इंजीनियर एण्ड टैक्नोलॉजी, चैन्नई, भारतीदासन विश्वंविद्यालय, तमिलनाडू तथा राजस्थान सरकार की विभिन्न परियोजनाओं को भी सहायता प्रदान  की है। इसके अतिरिक्त, तेउविबो ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, भारत सरकार द्वारा हाइड्रोजन ओटो ईंधन के रूप में बढावा देने हेतु बनाए गए हाइड्रोजन कार्पस फन्ड (एचसीएफ) के लिए भी 40 करोड का योगदान दिया गया।

इक्विटी में निवेश करना -  इंडियन स्ट्रेटिजिक पेट्रोलियम लिमिटेड (आईएसपीआरएल) तेउविबो की सहायक कंपनी है। आईएसपीआरएल विशेष प्रयोजन व्यवस्था के माध्यम से तीन स्थानों अर्थात् विशाखापट्नम, मंगलौर तथा पादुर (उड्डपी के पास) 5 मिलियन मिलिट्रिक टन (एमएमटी) सामरिक करने कच्चे तेल भण्डार कर रहा है। ये सामरिक भंण्डार तेल कंपनियों के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पाादों के मौजूदा भण्डार के अलावा होगा और बाहरी आपूर्ति अवरोधों के लिए एक कुश्न के रूप में काम करेगा। आईएसपीआरएल की स्वीकृत इक्विटी में तेउविबो द्वारा रुपये 3832.56 करोड का योगदान है। 

कौशल विकास - तेउविबो ने पेट्रोफैड के साथ हाइड्रोकार्बन क्षेत्र कौशल परिषद (एचएसएससी) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाइड्रोकार्बन की विभिन्न कौशल आवश्यकताओं को पूरा करना तथा स्थानीय और विश्व‍ स्तर पर रोजगार और अवसरों को बढाना एचएसएससी का उद्देश्य है। 

राहत गतिविधियॉं - तेउविबो, सूखा राहत ट्रस्ट का भी रखरखाव करता है। इस ट्रस्ट का गठन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा 9.7.2000 को किया गया। वर्ष 2001-02 में इसके गठन के बाद से अब तक ट्रस्ट द्वारा लगभग 15 करोड रुपये जारी किए जा चुके हैं।


अंतिम अद्यतन तिथि: 08/11/2017
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